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Swami Dayanand Saraswati Quotes Hindi स्वामी दयानंन्द सरस्वती


    • Quote 1 – “ये ‘शरीर’ ‘नश्वर’ है, हमे इस शरीर के जरीए ````सिर्फ एक मौका मिला है, खुद को साबित करने का कि, ‘````मनुष्यता````’ और ‘आत्मविवेक’ क्या है।

    • स्वामी दयानंन्द सरस्वती

    • Quote 2 – “जब ‘मनुष्य’ ```अपने ‘क्रोध’ पर विजय पा ले, ‘काम’ को काबू मे कर ले, ‘यश’ की इच्छा को त्याग दे, ‘माया’ ````जाल से विरक्त हो जाये```` तब उसमे जो “दिव्य विभुतियाँ “आती है। उसे ही “कुण्डिलनी शक्ति” कहते है।”

    • स्वामी दयानंन्द सरस्वती

    • Quote 3 – “जिस ‘मनुष्य’ मे ‘संतुष्टि’ के ‘अंकुर’ फुट गये हों, वो ‘संसार’ के ‘सुखी’ मनुष्यों मे गिना जाता है।” ~ स्वामी दयानन्द सरस्वती।

    • स्वामी दयानंन्द सरस्वती

    • Quote 4 – “यश और ‘कीर्ति’ ऐसी ‘```विभूतियाँ```’ है, जो मनुष्य को ‘संसार’ के माया जाल से निकलने मे सबसे बङे ‘अवरोधक’ होते है।”

    • स्वामी दयानन्द सरस्वती

    • Quote 5 – “आत्मा, ‘````परमात्मा````का एक अंश है, जिसे हम अपने ‘कर्मों’ से ‘गति’ प्रदान करते है। फिर ‘आत्मा’ हमारी ‘दशा’ तय करती है।”

    • Quote 6 – “मानव को अपने पल-पल को ‘```आत्मचिन्तन’ मे लगाना चाहिए, क्योकी हर क्षण हम ‘परमेश्वर’ द्वार दिया गया ‘समय’ खो रहे है।”

    • Quote 7 – “मनुष्य की ‘विद्या उसका अस्त्र’, ‘````धर्म उसका रथ’, ‘सत्य उसका सारथी’ और ‘भक्ति रथ के घोङे होते है````

    • Quote 8 – “इस ‘नश्वर शरीर’ से ‘प्रेम’ करने के बजाय हमे ‘परमेश्वर’ से प्रेम करना चाहिए, ‘सत्य और धर्म, ‘ से प्रेम करना चाहिए; क्योकी ये ‘नश्वर’ नही हैं।”

    • Quote 9 – “जिसको परमात्मा ``और जीवात्मा का यथार्थ ज्ञान, जो आलस्य को छोड़कर सदा उद्योगी, सुख दुःख आदि का सहन, धर्म का नित्य सेवन करने वाला, जिसको कोई पदार्थ धर्म से छुड़ा कर अधर्म की ओर न खेंच सके वह पण्डित कहाता है।”

    • Quote 10 – “उस सर्वव्यापक ईश्वर को योग द्वारा जान लेने पर हृदय की अविद्यारुपी गांठ कट जाती है, सभी प्रकार के संशय दूर हो जाते है और भविष्य में किये जा सकने वाले पाप कर्म नष्ट हो जाते है अर्थात ईश्वर को जान लेने पर व्यक्ति भविष्य में पाप नहीं करता |

    • Quote 11 –````जिसने गर्व किया`````उसका पतन अवश्य हुआ है ```Read this```सुपरस्टार विल स्मिथ के अनमोल विचार

    • Quote 12 – “काम करने से पहले सोचना बुद्धिमानी, काम करते हुए सोचना सतर्कता, और काम करने के बाद सोचना मूर्खता है।”

    • Quote 13 – ````वेदों मे वर्णीत सार का पान करनेवाले ही ये जान सकते हैं कि ‘जिन्दगी’ का मूल बिन्दु क्या है।” ~ स्वामी दयानन्द सरस्वती।

    • Quote 14 – क्रोध का भोजन ‘विवेक’ है, अतः इससे बचके रहना चाहिए। क्योकी ‘विवेक’ नष्ट हो जाने पर, सब कुछ नष्ट हो जाता है।

    • Quote 15 – अहंकार’ एक मनुष्य के अन्दर वो स्थित लाती है, जब वह ‘आत्मबल’ और ‘आत्मज्ञान’ को खो देता है।

    • स्वामी दयानंन्द सरस्वती के प्रेरणात्मक कथन

    • Quote 16 – मानव’ जीवन मे ‘तृष्णा’`` और ‘लालसा’ है, और ये दुखः के मूल कारण है।

    • Quote 17 – क्षमा’ करना सबके बस ``की बात नहीं, क्योंकी ये मनुष्य को बहुत बङा बना देता है।” ~ स्वामी दयानन्द सरस्वती

    • Quote 18 – ‘काम’ मनुष्य के ‘विवेक’ को ```भरमा``` कर उसे पतन के मार्ग पर ले जाता है।

    • Quote 19 – लोभ वो अवगुण है, जो दिन प्रति ```दिन तब तक बढता ही जाता है, जब तक मनुष्य का विनाश ना कर दे।

    • Quote 20 -मोह एक अत्यंन्त ```विस्मित जाल है, जो बाहर से अति सुन्दर और अन्दर से अत्यंन्त कष्टकारी है; जो इसमे फँसा वो पुरी तरह उलझ ही गया।

    • Quote 21 – ईष्या``` से मनुष्य को हमेशा दूर रहना चाहिए। क्योकि ये ‘मनुष्य’ को अन्दर ही अन्दर जलाती रहती है और पथ से भटकाकर पथ भ्रष्ट कर देती है।

    • Quote 22 – मद ‘मनुष्य की वो स्थिति या दिशा’ है, जिसमे वह अपने ‘मूल कर्तव्य’ से भटक कर ‘विनाश’ की ओर चला जाता है।

    • Quote 23 – ``संस्कार ही ‘मानव’ के ‘आचरण’ का नीव होता है, जितने गहरे ‘संस्कार’ होते हैं, उतना ही ‘अडिग’ मनुष्य अपने ‘कर्तव्य’ पर, अपने ‘धर्म’ पर, ‘सत्य’ पर और ‘न्याय’ पर होता है।” click – जीवन में कभी हार नहीं माननी चाहिए

    • Quote 24 – अ`गर ‘मनुष्य’ का मन ‘शाँन्त’ है````‘चित्त’ प्रसन्न है, ह्रदय ‘हर्षित’ है, तो निश्चय ही ये अच्छे कर्मो का ‘फल’ है।

    • Quote 25 – ``भगवान का ना कोई रूप है ना रंग है````. वह अविनाशी और अपार है. जो भी इस दुनिया में दिखता है वह उसकी महानता का वर्णन करता है.

    • Quote 26 – ```उपकार बुराई का अंत करता है```, सदाचार की प्रथा का आरम्भ करता है, और  लोक-कल्याण तथा सभ्यता में योगदान देता है.

    • Quote 27 – ``मोक्ष पीड़ा सहने और जन्म-मृत्यु की अधीनता से मुक्ति है```` और यह भगवान की अपारता में स्वतंत्रता और प्रसन्नता का जीवन है.

    • Quote 28 – ```अपने सामने रखने या याद करने के लिए लोगों की तसवीरें या अन्य तरह की पिक्चर लेना ठीक है. लेकिन भगवान् की तसवीरें और छवियाँ बनाना गलत है.

    • Quote 29 – ````लोगों को भगवान् को जानना``` और उनके कार्यों की नक़ल करनी चाहिए. पुनरावृत्ति और औपचारिकताएं किसी काम की नहीं हैं.

    • Quote 30 – ```वर्तमान जीवन का कार्य अन्धविश्वास``` पर पूर्ण भरोसे से अधिक महत्त्वपूर्ण है.

          • ```लेटेस्ट अपडेट व लगातार नयी जानकारियों``` के लिए हमारा फेसबुक पेज लाइक करे, आपका एक-एक लाइक व शेयर हमारे लिए बहुमूल्य है````अगर आपके पास इससे जुडी और कोई जानकारी है तो हमे`````




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